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फूलपुर व गोरखपुर संसदीय सीट पर बसपा करेगी बड़ा धमाका, इस दल को देगी समर्थन


LEFT NEWS : समाज में पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाने के प्रयासों और मानवीय मूल्यों की खबरें

फूलपुर व गोरखपुर संसदीय सीट पर बसपा करेगी बड़ा धमाका, इस दल को देगी समर्थन

फूलपुर व गोरखपुर संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनाव में बसपा बड़ा धमाका करने जा रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहले ही उपचुनाव नहीं लडऩे का ऐलान किया है, जिसके चलते दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं, लेकिन बसपा के कैडर वोटरों ने एक दल का साथ देने की तैयारी की है,जिसके खुलासे के बाद बीजेपी को झटका लगना तय हैं।
गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट से सपा व कांग्रेस दोनो ने ही अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि यूपी चुनाव 2017में सपा व कांग्रेस का गठबंधन अब खत्म हो गया है। उपचुनाव में महागठबंधन भी नहीं हुआ है इससे संसदीय चुनाव 2019 में महागठबंधन होने की उम्मीद को बड़ा झटका लग गया है। गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट पर बसपा के कैडर वोटर किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे। इसी बात पर संसदीय चुनाव 2019 का गठबंधन टिका हुआ है। पत्रिका ने जब बीएसपी के एक स्थानीय नेता से बात कि तो उन्होंने साफ कर दिया कि बसपा सुप्रीमो मायावती का जैसा निर्देश आयेगा वैसा ही पार्टी के वोटर करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बात की कांग्रेस को बसपा का साथ नहीं मिलने वाला है। बसपा का एक ही उद्देश्य है वह बीेजेपी को हराना। फूलपुर व गोरखपुर में बसपा के कैडर वोटर सपा के साथ जायेंगे। दोनों सीटों पर जो चुनाव परिणाम आयेगा उसके अनुसार संसदीय चुनाव 2019में सपा व बसपा में गठबंधन की मुहर लगेगी।
बीएसपी नेता ने कहा कि सपा व कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2017 में गठबंधन किया था और सपा को अब तक की सबसे करारी शिकस्त मिली थी इसकी मुख्य वजह थी कि कांग्रेस का परम्परागत वोटर सपा के साथ नहीं गया था। गठबंधन के तहत जिन सीटों कांग्रेस लड़ी थी वहां पर कांग्रेस के वोटरों ने अपनी पार्टी का साथ दिया था, लेकिन जिन सीटों पर सपा लड़ी थी वहां पर कांग्रेस का वोटर बीजेपी की तरफ चला गया था इसलिए अब सपा व बसपा को गठबंधन होगा। दोनों ही दलों के पास अपना कैडर वोटर है जो एक-दूसरे में शिफ्ट हो सकता है।
सपा व बसपा के एक होने से बीजेपी को नुकसान उठाना होगा। दोनों ही पार्टी के कैडर वोटरों के एक साथ होने से बीजेपी का यूपी में विजयी अभियान रुक सकता है ऐसे में अब सबकी निगाहे बसपा सुप्रीमो मायावती पर लगी है और वह जिस दल को समर्थन देगी। बीएसपी का कैडर वोटर उधर ही जायेगा।
सपा व बसपा के बीच अब दूरी खत्म हो रही है। सपा में मुलायम सिंह यादव के हटने के बाद से अखिलेश यादव ने पार्टी की पूरी कमान अपन हाथ में ले ली है इसके बाद अखिलेश यादव ने मायावती को लगातार बुआ कह कर संबोधित किया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अखिलेश को बबुआ तक कहा था इसके बाद दोनों ही नेताओं ने साथ मिल कर चुनाव लडऩे के संकेत दिये थे जो अब वास्तविकता बनने वाला है।

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फूलपुर व गोरखपुर संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनाव में बसपा बड़ा धमाका करने जा रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहले ही उपचुनाव नहीं लडऩे का ऐलान किया है, जिसके चलते दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं, लेकिन बसपा के कैडर वोटरों ने एक दल का साथ देने की तैयारी की है,जिसके खुलासे के बाद बीजेपी को झटका लगना तय हैं।
गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट से सपा व कांग्रेस दोनो ने ही अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि यूपी चुनाव 2017में सपा व कांग्रेस का गठबंधन अब खत्म हो गया है। उपचुनाव में महागठबंधन भी नहीं हुआ है इससे संसदीय चुनाव 2019 में महागठबंधन होने की उम्मीद को बड़ा झटका लग गया है। गोरखपुर व फूलपुर संसदीय सीट पर बसपा के कैडर वोटर किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे। इसी बात पर संसदीय चुनाव 2019 का गठबंधन टिका हुआ है। पत्रिका ने जब बीएसपी के एक स्थानीय नेता से बात कि तो उन्होंने साफ कर दिया कि बसपा सुप्रीमो मायावती का जैसा निर्देश आयेगा वैसा ही पार्टी के वोटर करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बात की कांग्रेस को बसपा का साथ नहीं मिलने वाला है। बसपा का एक ही उद्देश्य है वह बीेजेपी को हराना। फूलपुर व गोरखपुर में बसपा के कैडर वोटर सपा के साथ जायेंगे। दोनों सीटों पर जो चुनाव परिणाम आयेगा उसके अनुसार संसदीय चुनाव 2019में सपा व बसपा में गठबंधन की मुहर लगेगी।
बीएसपी नेता ने कहा कि सपा व कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2017 में गठबंधन किया था और सपा को अब तक की सबसे करारी शिकस्त मिली थी इसकी मुख्य वजह थी कि कांग्रेस का परम्परागत वोटर सपा के साथ नहीं गया था। गठबंधन के तहत जिन सीटों कांग्रेस लड़ी थी वहां पर कांग्रेस के वोटरों ने अपनी पार्टी का साथ दिया था, लेकिन जिन सीटों पर सपा लड़ी थी वहां पर कांग्रेस का वोटर बीजेपी की तरफ चला गया था इसलिए अब सपा व बसपा को गठबंधन होगा। दोनों ही दलों के पास अपना कैडर वोटर है जो एक-दूसरे में शिफ्ट हो सकता है।
सपा व बसपा के एक होने से बीजेपी को नुकसान उठाना होगा। दोनों ही पार्टी के कैडर वोटरों के एक साथ होने से बीजेपी का यूपी में विजयी अभियान रुक सकता है ऐसे में अब सबकी निगाहे बसपा सुप्रीमो मायावती पर लगी है और वह जिस दल को समर्थन देगी। बीएसपी का कैडर वोटर उधर ही जायेगा।
सपा व बसपा के बीच अब दूरी खत्म हो रही है। सपा में मुलायम सिंह यादव के हटने के बाद से अखिलेश यादव ने पार्टी की पूरी कमान अपन हाथ में ले ली है इसके बाद अखिलेश यादव ने मायावती को लगातार बुआ कह कर संबोधित किया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अखिलेश को बबुआ तक कहा था इसके बाद दोनों ही नेताओं ने साथ मिल कर चुनाव लडऩे के संकेत दिये थे जो अब वास्तविकता बनने वाला है।

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